August 4, 2022



डिजिटल डेस्क, भोपाल। इंग्लैंड के स्टार क्रिकेटर जो रुट इन दिनों शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्डस टेस्ट मैच में शतक लगाकर वो टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम समय में 10 हजार रन बनाने वाले बेट्समैन बन गए हैं। रुट ने अपने ही देश के पूर्व क्रिकेटर एलिस्टर कुक और दिग्गज भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रुट ने जहां 9 साल 156 दिनों में तो वहीं कुक ने 10 साल 87 दिन में व सचिन ने 31 साल 326 दिनों में 10 हजार रनों का आंकड़ा पार किया था। 

जिस गति से रुट रन बना रहे हैं उससे यह चर्चा तेज हो गई हैं कि, वह टेस्ट क्रिकेट में सचिन के दो सबसे बड़े तोड़ रिकॉर्ड सकते हैं। पहला रिकॉर्ड है, सबसे ज्यादा मैच खेलने का और दूसरा सबसे ज्यादा रन बनाने का। बात करें सचिन के टेस्ट करियर की तो उन्होंने 200 मैचों में 15 हजार 921 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 53.79 रहा।  

आइए जानते हैं उन वजहों को जिनके कारण रुट के सचिन से आगे निकलने की चर्चाएं हो रही हैं 

करियर के शुरुआती सालों में सचिन से बेहतर रिकॉर्ड

अगर दोनों के करियर के प्रारंभिक 10 सालों की तुलना करें तो रुट का रिकॉर्ड सचिन से बेहतर है। जहां सचिन ने अपने करियर के शुरुआती 10 सालों में 73 टेस्ट मैच खेलकर 56.71 के औसत से 5841 रन बनाए थे। वहीं रुट शुरुआत के 10 सालों में 118 टेस्ट मैंचों में 49.58 के औसत से 10015 रन बना चुके हैं। 
दोनों के उम्र की तुलना करें तो अभी रुट 31 साल के हैं। वहीं बात करें सचिन की उम्र की तो उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट 40 साल से ज्यादा की उम्र में खेला था। ऐसे में अगर रुट सचिन के नक्शे-कदम पर चलकर 40 साल की उम्र तक खेल जाते हैं, तो वह आराम से सचिन का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।

इंग्लैंड का ज्यादा टेस्ट मैच खेलना

जो रुट के द्वारा सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावना को एक और वजह से बल मिलता है। वह वजह है अन्य टीमों खासकर भारत की तुलना में इंग्लैंड का टेस्ट मैच अधिक खेलना। आंकड़ो पर नजर डालें तो बीते 10 सालों में इंग्लैंड ने 126 टेस्ट मैच खेले हैं और बीते पांच सालों में 66 मैच। ऐसे में अगर रुट अगर 7-8 साल और क्रिकेट खेल जाते हैं तो वो सचिन के सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकते हैं। 

कप्तानी छोड़ने से हटा प्रेशर

कप्तानी के कारण रुट के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी हो रही थी। इस कारण उन्होंने इस साल न्यूजीलैंड के विरुध्द सीरीज शुरु होने के पहले इंग्लैंड टेस्ट टीम की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। कप्तानी छोड़ने के बाद उन्होंने इस बात को स्वीकार भी किया कि कप्तानी का एकस्ट्रा प्रेशर उनकी हेल्थ के साथ परफॉरमेंस पर भी बुरा असर डाल रहा था। कप्तानी छोड़ने के बाद वह बिना किसी दवाब के केवल एक खिलाड़ी के रुप में अच्छा खेल पाएंगे। इसका एक नमूना उन्होंने लॉर्डस टेस्ट मैच की चौथी पर शतक ठोककर दे दिया।

टेस्ट क्रिकेट को देते हैं ज्यादा प्राथमिकता

रुट इंग्लैंड के लिए टेस्ट मैचों की तुलना में वनडे व टी-20 मैच कम ही खेलते हैं। न ही वो आईपीएल में नजर आते हैं। वह इंग्लैंड के सिंगल फॉर्मेट विशेषज्ञ हैं। वो अपना ज्यादा फोकस अन्य फारमेटों की तुलना में टेस्ट मैंचों पर रखते हैं। जिसका फायदा उन्हें अपने कैरियर को लंबे समय तक बढ़ाने में होगा। एक ही फॉरमेट में खेलने के कारण रुट के लिए ज्यादा उम्र में भी अपनी फिटनेस को बनाए रखना आसान होगा।  

       
 



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